“SIR अभियान के दबाव में एक और बीएलओ की मौत, परिजनों ने अधिकारियों पर लगाया गंभीर आरोप”

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देशभर में चुनाव आयोग द्वारा 12 राज्यों में चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के दौरान बीएलओ (BLO) कर्मचारियों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। मंगलवार को गोंडा के एक बीएलओ की लखनऊ में इलाज के दौरान हुई मौत ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिला दिया है। जानकारी के अनुसार, बीएलओ ने संदिग्ध परिस्थितियों में जहर सेवन कर लिया था। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

परिवार का आरोप—काम का दबाव बना वजह

मृतक बीएलओ के परिजनों ने आरोप लगाया है कि SIR से जुड़े भारी काम के दबाव और अधिकारियों के निरंतर दबाव ने उसे यह कदम उठाने पर मजबूर किया। परिवार ने एसडीएम, बीडीओ और लेखपाल पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है।
अस्पताल में इलाज के दौरान बीएलओ का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह खुद पर पड़े दबाव का ज़िक्र कर रहा है। उसने कहा—“दबाव के कारण मेरी यह हालत हुई है… एसडीएम, बीडीओ और लेखपाल का दबाव था।”

पुलिस मौजूदगी में बॉडी जौनपुर भेजी गई

पोस्टमार्टम पूरा होने के बाद पुलिस की मौजूदगी में शव को जौनपुर स्थित पैतृक निवास ले जाया गया। मृतक बीएलओ का विसरा सुरक्षित रख लिया गया है, जिसे आगे की जांच के लिए संरक्षित किया गया है।

कई राज्यों में लगातार मौतें, चिंता में आयोग

गौरतलब है कि SIR अभियान शुरू होने के बाद से विभिन्न राज्यों—खासकर उत्तर प्रदेश—में कई बीएलओ की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं। कई मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सुसाइड नोट और परिजनों के बयानों में काम के बोझ और मानसिक दबाव को मौत की वजह बताया गया है। लगातार बढ़ते ऐसे मामलों ने चुनाव आयोग सहित राज्य प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है, और इस पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं कि सुरक्षा और काम-काज के मानकों के बिना इतने व्यापक अभियान को कैसे चलाया जा रहा है।

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