सरगुजा/अंबिकापुर। विशेष रिपोर्ट।
अंबिकापुर। ब्रह्माकुमारीज संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी प्रकाशमणि जी की 19वीं पुण्यतिथि एवं विश्व बंधुत्व दिवस के उपलक्ष्य में देशभर में चलाए जा रहे रक्तदान महाअभियान के तहत अंबिकापुर के नव विश्व भवन, चोपड़ा पारा स्थित ब्रह्माकुमारीज सेवा केंद्र में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक चले इस शिविर में 80 लोगों ने पंजीयन कराया, जबकि 60 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया।

शिविर का शुभारंभ नगर पालिका निगम अंबिकापुर की महापौर श्रीमती मंजूषा भगत, जिला क्षय रोग अधिकारी एवं ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र गुप्ता, डॉ. रोशनी, वरिष्ठ समाजसेवी अजय तिवारी, मंगल पाण्डेय, अनिल कुमार मिश्रा एवं ब्रह्माकुमारीज की राजयोगिनी विद्या दीदी ने दीप प्रज्वलित कर किया।
इस अवसर पर महापौर मंजूषा भगत ने दादी प्रकाशमणि जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि कई बार समय पर रक्त उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों की जान चली जाती है। ऐसे में रक्तदान किसी जरूरतमंद के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने ब्रह्माकुमारीज संस्थान के इस प्रयास की सराहना करते हुए लोगों से अधिक से अधिक रक्तदान करने की अपील की।
दादी प्रकाशमणि के सेवा और विश्व कल्याण के संदेश को समर्पित आयोजन
ब्रह्माकुमारीज अंबिकापुर सेवा केंद्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी विद्या दीदी ने कहा कि दादी प्रकाशमणि जी का जीवन त्याग, सेवा, प्रेम और विश्व कल्याण का प्रेरणादायक उदाहरण रहा है। उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए रक्तदान शिविर का आयोजन जरूरतमंदों की सेवा के लिए एक विनम्र प्रयास है।
उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा भारत और नेपाल में 21 से 25 अगस्त तक रक्तदान शिविरों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है। इस महाअभियान के अंतर्गत भारत में एक लाख यूनिट रक्त एकत्रित करने का लक्ष्य रखा गया है।
रक्तदान के फायदे बताए
शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय की डॉ. रोशनी ने रक्तदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 18 से 60 वर्ष तक के स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि रक्तदान से शरीर में नए रक्त के निर्माण की प्रक्रिया सक्रिय होती है और एक यूनिट रक्त कई जरूरतमंद मरीजों के उपचार में उपयोगी हो सकता है। उन्होंने रक्तदान को लेकर लोगों में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करते हुए अधिक से अधिक लोगों को इस पुनीत कार्य से जुड़ने का आह्वान किया।
डॉ. शैलेंद्र गुप्ता ने कहा कि रक्तदान किसी व्यक्ति को नया जीवन देने जैसा पुण्य कार्य है। वहीं वरिष्ठ समाजसेवी मंगल पाण्डेय ने कहा कि रक्तदान के प्रति जागरूकता की शुरुआत अपने परिवार से करनी चाहिए।

63 वर्षीय अजय तिवारी ने 111वीं बार किया रक्तदान
शिविर का सबसे प्रेरणादायक पहलू वरिष्ठ समाजसेवी 63 वर्षीय अजय तिवारी का रक्तदान रहा। अजय तिवारी इससे पहले 110 बार रक्तदान कर चुके थे और इस शिविर में उन्होंने 111वीं बार रक्तदान कर समाज के सामने मिसाल पेश की।
उनके इस समर्पण ने विशेष रूप से युवाओं और रक्तदान को लेकर झिझक रखने वाले लोगों को प्रेरित किया। आयोजकों ने कहा कि उम्र के इस पड़ाव पर भी लगातार रक्तदान करने का उनका जज्बा समाज के लिए अनुकरणीय है।
हर वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
शिविर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विशेष शाखा सरगुजा अमोलक सिंह ढिल्लो, एसडीओपी राकेश बघेल, वरिष्ठ समाजसेवी अजय तिवारी, वरिष्ठ भाजपा नेता रमेश प्रसाद जायसवाल, पशुधन विकास विभाग के अतिरिक्त उपसंचालक डॉ. सी.के. मिश्रा, सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी उमेश कुशवाहा, वरिष्ठ शिक्षक लल्लू भाई, युवा समाजसेवी अनिल कुमार मिश्रा, प्रकाश गुप्ता सहित बड़ी संख्या में ब्रह्माकुमारीज के भाई-बहनों एवं समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने रक्तदान किया।
खास बात यह रही कि 50 वर्ष से अधिक आयु के कई लोगों ने भी रक्तदान कर समाज के सामने प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया।
इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रितेश चौधरी, वरिष्ठ समाजसेविका वंदना दत्ता, एसडीओपी प्रतापपुर महालक्ष्मी कुलदीप, दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. बी.डी. साहू एवं डॉ. ज्योति साहू सहित अन्य लोगों ने भी दादी प्रकाशमणि जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए रक्तदान के लिए लोगों को प्रेरित किया।
मेडिकल टीम ने संभाली रक्त संग्रह की जिम्मेदारी
रक्त संग्रह का कार्य राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं सह अस्पताल की टीम ने किया। टीम में चिकित्सकों के साथ काउंसलर अंजुला मिश्रा, स्टाफ नर्स रीता थॉमस, जिला लैब टेक्नीशियन हरिहर सिंह, लैब टेक्नीशियन संध्या सिंह, ग्लोरिया तिर्की एवं संगीता पैकरा शामिल रहीं।
रक्तदाताओं को ब्रह्माकुमारीज संस्थान की ओर से प्रमाण पत्र एवं ईश्वरीय सौगात तथा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय की ओर से प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
अंबिकापुर में आयोजित यह रक्तदान शिविर महज रक्त संग्रह का आयोजन नहीं, बल्कि मानव सेवा, विश्व बंधुत्व और जरूरतमंदों के जीवन को बचाने के संकल्प का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।









