सीधी/टिकरी। विशेष रिपोर्ट।
सीधी/टिकरी। सीधी जिले के मझौली थाना क्षेत्र अंतर्गत उपतहसील मड़वास के ग्राम टिकरी में एक गरीब परिवार के निर्माणाधीन आवास को बुलडोजर से गिराए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि भूमि विवाद का मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद तहसीलदार द्वारा एकतरफा कार्रवाई करते हुए निर्माणाधीन मकान को जमींदोज करा दिया गया। मूसलाधार बारिश के बीच हुई इस कार्रवाई ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

न्यायालय में मामला लंबित, फिर भी कार्रवाई पर सवाल
पीड़ित परिवार के अनुसार संबंधित भूमि रकबा क्रमांक 572, जिसकी कुल भूमि करीब एक एकड़ बताई जा रही है, को लेकर मामला व्यवहार न्यायालय मझौली में विचाराधीन है। मामले में अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को निर्धारित बताई गई है। इसके बावजूद निर्माणाधीन आवास पर बुलडोजर चलाए जाने को लेकर पीड़ित परिवार ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
पीड़ित राजकुमार पटवा और प्रदीप कुमार पटवा का आरोप है कि उनके कब्जे वाली भूमि पर कार्रवाई कर उनका प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माणाधीन घर गिरा दिया गया। परिवार का कहना है कि जब मामला न्यायालय में लंबित था तो आखिर किस आधार पर और किस अधिकार के तहत यह कार्रवाई की गई।
पूर्व सरपंच पर भी गंभीर आरोप
मामले में ग्राम पंचायत टिकरी की पूर्व सरपंच सरोज साकेत पर भी पीड़ित परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का दावा है कि वर्ष 2013-14 के दौरान रखवा क्रमांक 572 एवं अंश भूमि 572/1 और 572/2 से संबंधित करीब एक एकड़ सिंचित भूमि की रजिस्ट्री कथित तौर पर मानसिक रूप से विक्षिप्त बताए जा रहे करीब 75 वर्षीय राममनोहर पटवा से कराई गई थी।
पीड़ित पक्ष ने इस रजिस्ट्री की प्रक्रिया और परिस्थितियों पर भी सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
‘साठगांठ और पद के दुरुपयोग’ के आरोप
पीड़ित परिवार ने तहसीलदार और पूर्व सरपंच के बीच कथित मिलीभगत तथा पद के दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं। परिवार का आरोप है कि तहसीलदार ने स्वयं मौके पर मौजूद रहकर कार्रवाई कराई और न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद बेदखली की कार्रवाई को अंजाम दिया।
वहीं, स्थानीय स्तर पर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और जमीन से जुड़े मामलों में कथित अनियमितताओं को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि कथित साठगांठ, कमीशनखोरी अथवा आर्थिक लेन-देन के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मूसलाधार बारिश में घर उजाड़ने पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल कार्रवाई के समय को लेकर भी खड़ा हो रहा है। जिस समय क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही है, उसी दौरान एक गरीब परिवार के निर्माणाधीन आवास को गिराए जाने से मानवीय संवेदनाओं और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।
पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि भूमि से कब्जा हटाने की कार्रवाई आवश्यक थी, तो क्या ऐसी कार्रवाई के लिए भीषण बारिश का समय उचित था? परिवार का आरोप है कि उन्हें अचानक बेघर जैसी स्थिति में पहुंचा दिया गया।

कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार
मामले को लेकर पीड़ित परिवार ने सीधी कलेक्टर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिवार ने निर्माणाधीन मकान गिराए जाने की कार्रवाई की जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर उचित कार्रवाई और हुए नुकसान का मुआवजा दिलाने की मांग की है।
अब पूरे मामले में प्रशासन की ओर से क्या स्पष्टीकरण सामने आता है और न्यायालय में लंबित भूमि विवाद के बावजूद हुई कार्रवाई की वैधानिकता की जांच किस स्तर पर होती है, यह देखने वाली बात होगी।
फिलहाल, गरीब परिवार के निर्माणाधीन घर पर बुलडोजर चलाए जाने और न्यायालय में भूमि विवाद लंबित होने के दावे ने पूरे मामले को गंभीर सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।









