अंबिकापुर | सरगुजा, छत्तीसगढ़
अनुपम वस्त्रालय प्रकरण को लेकर सरगुजा में एक बार फिर सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। कथित यौन दुर्व्यवहार की पीड़िता आदिवासी महिला को न्याय दिलाने और उसके खिलाफ की जा रही कथित बयानबाजी के विरोध में सर्व आदिवासी समाज महिला प्रकोष्ठ ने मोर्चा खोल दिया है। जिला अध्यक्ष सुनीता सोनहा के नेतृत्व में थाना प्रभारी, अजाक, अंबिकापुर को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच, पीड़िता की सुरक्षा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
क्या है पूरा मामला?
ज्ञापन के अनुसार, 11 अगस्त 2026 को अंबिकापुर के स्कूल रोड स्थित अनुपम वस्त्रालय में एक आदिवासी महिला के साथ दुकान संचालक द्वारा कथित यौन दुर्व्यवहार की घटना सामने आई थी। इस मामले में थाना सिटी कोतवाली, अंबिकापुर में अपराध क्रमांक 0563/2026 के तहत BNS की धारा 74 एवं 351(3) में प्रकरण दर्ज किया गया था।
सर्व आदिवासी समाज का आरोप है कि प्रारंभिक विवेचना के दौरान पीड़िता के पूरे बयान को FIR और विवेचना में शामिल नहीं किया गया तथा आरोपी की सही पहचान को लेकर भी गंभीर सवाल उठे। ज्ञापन में कहा गया है कि इस मामले में प्रारंभिक विवेचक प्रधान आरक्षक राजेश चतुर्वेदी को वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निलंबित किया जा चुका है।
हालांकि, समाज का दावा है कि अब तक पीड़िता का पूरक अथवा पुनः कथन विधिवत दर्ज नहीं किया गया है और मामले में आवश्यक कानूनी धाराओं को भी नहीं जोड़ा गया है।
रवीन्द्र तिवारी पर गंभीर आरोप, चरित्र हनन का मुद्दा गरमाया
सर्व आदिवासी समाज ने CAIT सरगुजा से जुड़े उपाध्यक्ष रवीन्द्र तिवारी और उनके साथियों पर पीड़िता के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक बयानबाजी करने का आरोप लगाया है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देकर प्रकरण को खात्मा करने का दबाव बनाया जा रहा है। समाज के अनुसार, सार्वजनिक बयानबाजी में पीड़िता पर शंकरगढ़ थाने में पूर्व में भी इसी तरह का कृत्य करने का आरोप लगाया गया तथा आदिवासी समुदाय के संबंध में आर्थिक लाभ के लालच में SC/ST Atrocity Act के दुरुपयोग जैसी कथित टिप्पणी की गई।
समाज ने इन आरोपों को पीड़िता के चरित्र हनन और पूरे आदिवासी समुदाय के अपमान से जोड़ते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस समाचार में उपलब्ध नहीं है। संबंधित पक्षों का आधिकारिक जवाब सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
ज्ञापन में रखी गईं ये प्रमुख मांगें
1. शंकरगढ़ थाने के रिकॉर्ड का सत्यापन
पुलिस से मांग की गई है कि शंकरगढ़ थाने में पीड़िता के विरुद्ध पूर्व में ऐसा कोई रिकॉर्ड दर्ज है या नहीं, इसका आधिकारिक सत्यापन किया जाए। दावा गलत पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

2. डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित किया जाए
रवीन्द्र तिवारी के कथित बयान के मूल वीडियो, ऑडियो, सोशल मीडिया पोस्ट और मेटाडेटा को सुरक्षित कर निष्पक्ष जांच की जाए।
3. SC/ST Act के तहत FIR की मांग
आदिवासी समाज के संबंध में कथित सार्वजनिक जातिगत टिप्पणी के आरोपों की जांच कर SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के तहत मामला दर्ज करने की मांग रखी गई है।

4. पीड़िता का पूरक कथन और उचित धाराएं
अपराध क्रमांक 0563/2026 में पीड़िता का पूरक कथन दर्ज किया जाए। केस डायरी में आवश्यक सुधार कर सुसंगत धाराएं जोड़ी जाएं और वास्तविक आरोपी की सही पहचान सुनिश्चित की जाए।

5. पीड़िता व गवाहों की सुरक्षा
पीड़िता या गवाहों पर दबाव बनाने तथा जांच में अवैध हस्तक्षेप करने वाले लोगों की भूमिका तय कर वैधानिक कार्रवाई की जाए।
6. वास्तविक आरोपी की गिरफ्तारी
मामले की प्रकृति को देखते हुए वास्तविक आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की गई है।

कार्रवाई नहीं हुई तो हुंकार रैली
सर्व आदिवासी समाज ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो समाज अपने संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए शासन-प्रशासन के समक्ष शांतिपूर्ण हुंकार रैली आयोजित करेगा।
समाज का कहना है कि पीड़िता को न्याय मिलना चाहिए और किसी भी पक्ष के दबाव के बिना कानून के अनुसार जांच पूरी की जानी चाहिए।
अनुपम वस्त्रालय प्रकरण में अब जांच की निष्पक्षता, पीड़िता के अधिकारों और सार्वजनिक बयानबाजी की सत्यता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एक ओर सर्व आदिवासी समाज ने कार्रवाई की मांग तेज कर दी है, वहीं पूरे मामले में पुलिस की आधिकारिक जांच और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
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