छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने रियल एस्टेट क्षेत्र में उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। यह फैसला दुर्ग जिले के कोहका स्थित “आशीर्वाद अपार्टमेंट” परियोजना से जुड़ा है, जिसमें एक प्रमोटर को फ्लैट आवंटी को 28.71 लाख रुपये की राशि ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया गया है।
प्रकरण के अनुसार, आवंटी और प्रमोटर के बीच हुए अनुबंध के दो वर्ष बाद भी फ्लैट का पजेशन नहीं दिया गया। निर्माण कार्य अधूरा पड़ा रहा, जिससे आवंटी को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। रेरा ने इस मामले में सख्ती दिखाते हुए प्रमोटर को 23.71 लाख रुपये की मूल धनराशि तथा 5 लाख रुपये ब्याज सहित कुल 28.71 लाख रुपये लौटाने का आदेश जारी किया है।
रेरा के अनुसार, प्रमोटर की लापरवाही उपभोक्ता के विश्वास के साथ-साथ रेरा अधिनियम का भी उल्लंघन है। रेरा रजिस्ट्रार ने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर होमबायर को समय पर उसका हक मिले। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय सभी प्रमोटरों के लिए एक सख्त संदेश है कि उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी या अनावश्यक देरी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस आदेश से न केवल संबंधित आवंटी को राहत मिली है, बल्कि यह अन्य होमबायर्स के लिए भी एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया है। रेरा ने उपभोक्ताओं से आग्रह किया है कि वे जागरूक रहें और किसी भी तरह की समस्या होने पर रेरा पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कर अपने अधिकारों की रक्षा करें।








