लखनपुर जनपद में ई-रिक्शा योजना ठप! जिम्मेदार कौन – लापरवाह अफसर या सिस्टम की गड़बड़ी?

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पंचायतों में पड़े हैं ई-रिक्शा कबाड़ की हालत में, गांवों में सफाई अब भी हाथगाड़ी से


लखनपुर में सरकारी ई-रिक्शा योजना फेल, गांवों में फैली गंदगी

सरकार ने ग्रामीण स्वच्छता और कचरा प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए लखनपुर जनपद पंचायत के सभी ग्राम पंचायतों को ई-रिक्शा वितरित किए थे। उद्देश्य था—गांवों में ठोस और तरल कचरे का समय पर संग्रहण, ताकि पर्यावरणीय संतुलन बना रहे और साफ-सफाई बनी रहे। लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।

ज्यादातर गांवों में ई-रिक्शा अनुपयोगी, कुछ लापता

ग्रामीण इलाकों से मिली जानकारी के मुताबिक, अधिकांश पंचायतों में ई-रिक्शा या तो जर्जर हालत में बेकार खड़े हैं या फिर लापता हैं। यह हाल तब है जब करोड़ों रुपये की लागत से यह योजना शुरू की गई थी। कई पंचायतों में यह वाहन कबाड़ बन चुके हैं।

गांवों में अब भी हाथगाड़ी और मजदूरों से उठ रहा कचरा

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पंचायतों के पास ई-रिक्शा होने के बावजूद आज भी हाथगाड़ी और मजदूरों की मदद से कचरा उठाया जा रहा है। इससे स्पष्ट है कि या तो ई-रिक्शा का सही उपयोग नहीं हो रहा, या फिर इसके पीछे अधिकारियों की मिलीभगत है।

अहम सवाल जो जवाब मांगते हैं:

क्या सभी पंचायतों में ई-रिक्शा संचालन के लिए ड्राइवर नियुक्त किए गए?

कितनी बार अधिकारियों ने इस योजना की निगरानी की?

क्या इन वाहनों की स्थिति की कोई समीक्षा या रिपोर्ट तैयार की गई?

क्या जनता के पैसों से खरीदी गई ये गाड़ियां ऐसे ही बर्बाद होती रहेंगी?


जनता की मांगें तेज, जवाबदेही की गुहार

ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर अब आवाज उठानी शुरू कर दी है। उनकी मुख्य मांगें हैं:

1. जनपद एवं ग्राम पंचायत स्तर पर ई-रिक्शा उपयोग की स्थिति की जांच हो और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।


2. जिन पंचायतों में उपयोग नहीं हो रहा, वहाँ जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो।


3. प्रत्येक पंचायत में ई-रिक्शा संचालन की निगरानी के लिए एक समिति का गठन किया जाए।


4. योजना का सही क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए ताकि गांवों में स्वच्छता अभियान को मजबूती मिल सके।



सरकारी योजनाओं की जमीन पर असफलता—बड़ा सवाल

यह मामला केवल लखनपुर जनपद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक उदाहरण है कि सरकारी योजनाएं कैसे कागज़ों में सफल और जमीन पर असफल हो जाती हैं। यदि समय रहते जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो ये योजनाएं सिर्फ भ्रष्टाचार का अड्डा बनकर रह जाएंगी।

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