बेरोजगारों से सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा, 50 लाख की ठगी
बिलासपुर में एक बार फिर फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। आरोपी ठगों ने सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर छह युवाओं से करीब 50 लाख रुपये ठग लिए। जब एक पीड़ित युवक फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर कार्यालय पहुंचा, तो उसकी पोल खुल गई।
ऊंचे अधिकारियों से संबंध का दावा कर जमाया भरोसा
पीड़ितों में हेमूनगर निवासी मोनिशा सिंह समेत कुल छह बेरोजगार शामिल हैं। सभी ने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। उन्होंने बताया कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वे नौकरी की तलाश में थे, तभी उनकी मुलाकात अम्बिकापुर निवासी रजत गुप्ता और दुर्ग निवासी प्रिया देशमुख से हुई। दोनों ने खुद को बड़े अधिकारियों से जुड़ा बताते हुए सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा दिया।
सहायक अभियंता की फर्जी नियुक्ति से हुआ खुलासा
आरोपियों ने एक युवक को बिजली विभाग में असिस्टेंट इंजीनियर पद पर नियुक्त करने का झांसा देकर फर्जी नियुक्ति पत्र सौंपा। जब वह नियुक्ति पत्र लेकर बिजली विभाग के कार्यालय पहुंचा, तो वहां के अधिकारियों ने दस्तावेज को नकली घोषित कर दिया। यहीं से ठगी का पर्दाफाश हुआ।
राशि लौटाने के नाम पर शुरू हुई बहानेबाजी
जब पीड़ितों ने अपनी रकम वापस मांगी, तो आरोपियों ने टालमटोल शुरू कर दी। कभी मोबाइल स्विच ऑफ रहा, तो कभी झूठे वादे किए जाते रहे। धीरे-धीरे दोनों ने पीड़ितों से दूरी बना ली और संपर्क से बचने लगे।
प्रिया देशमुख और रजत गुप्ता पर FIR दर्ज, तलाश जारी
शिकायत के बाद सिविल लाइन पुलिस ने प्रिया देशमुख और रजत गुप्ता के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों की तलाश कर रही है।
बिलासपुर में सरकारी नौकरी के नाम पर एक बार फिर जालसाजी का गंभीर मामला सामने आया है। यह घटना न केवल बेरोजगारों की मजबूरी का फायदा उठाने का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि ऐसे फर्जीवाड़ों के खिलाफ सतर्कता और कड़ी कार्रवाई की जरूरत है।







