बुलंदशहर में भीषण सड़क हादसा: मजदूरों से भरा कैंटर ट्रक से टकराया, पांच की मौत, 29 घायल

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बुलंदशहर । जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के गांव रौंडा में शुक्रवार तड़के करीब चार बजे एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। पंजाब से अपने गांव लौट रहे ईंट भट्ठा मजदूरों से भरा एक कैंटर तेज रफ्तार के कारण अनियंत्रित होकर आगे चल रहे ट्रक से टकरा गया। इस हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई जबकि 29 अन्य घायल हो गए।

मृतकों में तीन शाहजहांपुर, एक हरदोई और एक कैंटर चालक शामिल है। घायलों में महिलाएं और बच्चे भी हैं, जिनका इलाज मेरठ मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में चल रहा है।

हादसे की वजह बनी तेज रफ्तार और स्पीड ब्रेकर

घायल आशीष ने जानकारी दी कि शाहजहांपुर और हरदोई के करीब 80-90 परिवार पंजाब के विभिन्न ईंट भट्ठों पर मजदूरी करते हैं। ठेकेदार मैंस के जरिए ये सभी आठ महीने पहले पंजाब के मोड़ा भट्टी क्षेत्र भेजे गए थे। रक्षाबंधन के बाद ये मजदूर तीन कैंटरों में सवार होकर अपने गांव लौट रहे थे।

घायलों के अनुसार, ड्राइवर सुनील कुमार को बार-बार धीरे चलाने की अपील की गई थी, लेकिन उसने अनसुना कर दिया। दो अन्य गाड़ियां आगे निकल चुकी थीं, जिन्हें पकड़ने के प्रयास में ड्राइवर ने रफ्तार बढ़ा दी। तभी गांव रौंडा के पास बने एक अनचिह्नित स्पीड ब्रेकर पर कैंटर अनियंत्रित होकर ट्रक से टकरा गया।

मृतकों में मां-बेटे भी शामिल, गांव में छाया मातम

शाहजहांपुर के मियांपुर गांव निवासी रवि (18) और उसकी मां माधुरी (40) की इस हादसे में मौके पर ही मौत हो गई। परिवार के अन्य सदस्य—पिता उमेश, भाई अजीत, मंजीत, बहन विट्टा देवी और अन्य घायल हो गए हैं। गांव में जैसे ही घटना की सूचना पहुंची, मातम छा गया। परिजन बिलखते रहे और लोगों की आंखें नम हो गईं।

इलाजरत घायलों की सूची

मेरठ मेडिकल कॉलेज में जिनका इलाज चल रहा है, उनमें सुरजीपुर (हरदोई), माईपुर, पपड़ीपुरा, और मियांपुर (शाहजहांपुर) के कई लोग शामिल हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी हैं। घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है।

लापरवाही की वजह: अनचिह्नित स्पीड ब्रेकर

जहांगीराबाद-बुलंदशहर मार्ग पर बने बिना रेडियम पट्टी वाले अव्यवस्थित ब्रेकर हादसे का कारण बन रहे हैं। ड्राइवरों को रात के अंधेरे में ये ब्रेकर नजर नहीं आते, जिससे वे वाहन पर नियंत्रण खो बैठते हैं।

प्रशासन की तत्परता

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और एंबुलेंस बुलाकर सभी घायलों को अस्पताल भेजा गया। सुबह पांच बजे से सायरन की आवाजें इलाके में गूंजती रहीं। टहलने निकले लोग भी अस्पताल पहुंचे और मदद में जुट गए।

यह हादसा सिर्फ एक ट्रैफिक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की कई खामियों को उजागर करता है—अव्यवस्थित सड़क संरचना, लापरवाह ड्राइविंग, और मजदूरों की असुरक्षित यात्रा व्यवस्था। प्रशासन को इससे सबक लेते हुए सड़क सुरक्षा और प्रवासी मजदूरों की यात्रा को सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

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