वाड्रफनगर में अवैध धान परिवहन का भंडाफोड़, प्रशासनिक संरक्षण के आरोप

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छत्तीसगढ़ । बलरामपुर / छत्तीसगढ़–उत्तरप्रदेश सीमा से लगे वाड्रफनगर क्षेत्र में अवैध धान परिवहन एक बार फिर प्रशासनिक संरक्षण के गंभीर आरोपों के घेरे में है। 8 जनवरी की रात ग्राम बसंतपुर (वाड्रफनगर) में यूपी से अवैध रूप से लाया जा रहा लगभग 65 बोरी धान से लदा एक पिकअप वाहन पकड़ा गया। मौके से ड्राइवर और उसके साथी फरार हो गए। वाहन को बसंतपुर थाना की गश्ती टीम को सौंपकर थाने लाने के निर्देश दिए गए।

जप्ती तो हुई, फिर कार्रवाई क्यों नहीं दिखी?

सूत्रों के मुताबिक इस जप्ती पर नायब तहसीलदार द्वारा चौड़े से फोटो खींचवाकर औपचारिक कार्रवाई की गई। लेकिन इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि
वह वाहन पुलिस ने किसके कहने पर और कितनी रकम में छोड़ा?
अगर वाहन व धान अवैध था, तो FIR/राजसात/कब्ज़ा/नीलामी जैसी वैधानिक प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई?

SDM वाड्रफनगर की भूमिका पर उठते सवाल

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि 8 जनवरी के बाद अवैध धान कोचियों से रोज़ाना ‘रोज़ी’ वसूली का एक तय सिस्टम चल रहा है।
दस लाख का सवाल यह है कि—

SDM वाड्रफनगर ने 8 जनवरी के बाद रोज़ी में कितने पैसे अवैध धान कोचियों से लिए?
SDM वाड्रफनगर ने सभी समिति प्रबंधकों से कितने में सेटिंग की?
क्या सीमा क्षेत्र में हो रही आवाजाही प्रशासनिक जानकारी और संरक्षण के बिना संभव है?
अगर नहीं, तो फिर पकड़े गए मामलों का अंजाम ‘छूट’ क्यों बन जाता है?

एक्टिव टिम पर कार्यवाही, ताकि असली चेहरा सामने ना आए?

उक्त मामले में एक पटवारी को छुट्टी पर भेजा गया है जबकि उस टिम के द्वारा ही कई कार्यवाही की गई लगभग माफियाओं के शीर्ष पर बैठे लोगों की परतें खुलने लगी तो SDM ने नायब तहसीलदार के बजाय पटवारी को ही रगड़ दिया। और संदेश दिया कि धान माफिया राज करेगा, जुल्म बार-बार करेगा।

पुलिस का बयान संदेह के घेरे में?

जिन दो पुलिस कर्मियों को नायब तहसीलदार ने बिना नम्बर की पिकअप वाहन 8 जनवरी सुबह 03.57 मिनट पर सुपुर्द किया तो वाहन किसके आदेश पर अवैध धान से लदी पिकअप वाहन को गैर प्रशासनिक कर्मचारी को सुपुर्द किया गया?
जबकि कोचिए को वहाँ से अपना वाहन निकालने के लिए पर्याप्त समय दिया गया।

सीमा क्षेत्र, धान माफिया और मौन?

वाड्रफनगर–बसंतपुर क्षेत्र लंबे समय से सीमा पार धान तस्करी का संवेदनशील कॉरिडोर माना जाता है। हर सीज़न में जप्तियों की खबरें आती हैं, पर ठोस दंडात्मक कार्रवाई और बड़ी मछलियों तक पहुंच नहीं दिखती।
इस मामले में भी—
ड्राइवर फरार
वाहन छूटा
धान का क्या हुआ—स्पष्ट नहीं

प्रशासनिक जवाबदेही तय हो?

यह मामला केवल एक वाहन या 65 बोरियों का नहीं, बल्कि प्रशासन–पुलिस–माफिया गठजोड़ के आरोपों का है।
जरूरी है कि—

जप्ती के बाद की पूरी फाइल सार्वजनिक की जाए।
वाहन किस आदेश पर छोड़ा गया—लिखित निर्देश सामने आए।
SDM वाड्रफनगर की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो।
फरार आरोपियों पर एफआईआर, तलाश और कुर्की की कार्रवाई हो।

जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक यह संदेह बना रहेगा कि वाड्रफनगर में कानून नहीं, ‘रोज़ी रेट’ चलता है।

भारत सम्मान की नज़र SDM वाड्रफनगर पर!

क्यूँकि पैसा खुदा तो नहीं, पर खुदा से कम भी नहीं, यह डायलॉग को बोलने वाले खुदा को प्यारे हो गए पर SDM वाड्रफनगर उसे पूरी तरह पालन कर रहे हैं। कई राज की परतें खुलनी बाकी है, अगली कड़ी पर टकटकी लगाए बैठें।

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