पोड़ी नदी में अवैध रेत खनन का बोलबाला, रोजाना 80 ट्राली रेत की अवैध निकासी से विभाग बेखबर

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कोरबा/पाली : पाली विकासखण्ड के ग्राम पोड़ी में स्थित टाटी नाला नदी से रेत का अवैध उत्खनन के साथ ही परिवहन का काम व्यापक पैमाने पर चल रहा है। अवैध रूप से चल रहे इस कार्य के खिलाफ कार्रवाई के बजाय खनिज कर्मचारी वसूली करने में मस्त है। इस कारण रेत के अवैध खनन पर लगाम नही लग पा रहा। हालात यह है कि नदी से दिनभर खुले में ही रेत निकालकर ट्रैक्टर ट्रालियों में भरने और परिवहन का काम आसानी से देखा जा सकता है। इससे टाटी नाला नदी अवैध रेत उत्खनन के लिए खदान के रूप में परिवर्तित होता चला जा रहा है और इससे नदी का कटाव बढ़ने के साथ ही आस्तित्व पर संकट पैदा होने लगा है।

टाटी नाला नदी ग्राम पोड़ी के पास से गुजरती है, जो बारहमासी नदी है। जिसमे अवैध रेत उत्खनन के कारण इसकी कटाव बढ़ती ही जा रही है। रेत चोर गांव के लोगों की मौजूदगी में दिनभर नदी के तट को गहरा कर रेत निकाल रहे है। पोड़ी में रोजाना पूरे दिन यही नजारा देखने को मिल रहा है। नदी से बिना किसी अनुमति रेत उत्खनन की शिकायतें खनिज विभाग के खनिज जांच नाका प्रभारी कर्मचारी से की जा चुकी है। लेकिन प्रभारी कर्मचारी कार्रवाई के स्थान पर प्रति ट्रैक्टर हजारों की वसूली में मदमस्त है। इस कारण नदी से प्रतिदिन 70 से 80 ट्रैक्टर ट्रालियां रेत निकल रहा है।

ऐसे में शासन को भारी राजस्व की चपत तो लगाई जा रही है, साथ ही टाटी नाला नदी के कटाव दिन प्रतिदिन बढ़ने से इसके अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगा है। उक्त नदी से अवैध रेत खनन कर परिवहन में लिप्त लोगों को न तो प्रशासन के किसी अधिकारी का डर है और न ही किसी अन्य का। क्योंकि वे इस कार्य के लिए संबंधितों तक महीना के हिसाब से रकम पहुँचाते है और जिसके कारण अवैध रेत कारोबारियों ने खनन की सारी पराकाष्ठा को लांघते हुए नदी के मुहाने को गहरा करने में लगे है। महीने में एकाक कार्रवाई को छोड़ दें तो हर दिन रेत चोर अपना काम मनमर्जी से करते आ रहे है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भले ही नदियों के मुहाने पर खनन पे प्रतिबंध लगाया हो, लेकिन संबंधितों की लापरवाही या यूं कहें कि मिलीभगत से खनन रोकने का प्रयास नही किया जा रहा। जिससे अवैध रेत खनन व परिवहन करने वालों के हौसले बुलंद है। एक ओर जिला प्रशासन अवैध रेत खनन और परिवहन को बर्दाश्त न करने की बात कहते हुए कार्रवाइयां लगातार जारी रखने की बात कह रहा है, वहीं दूसरी ओर जिले भर में यह अवैध गतिविधि रुकने का नाम ही नही ले रहा है। इससे जीवनदायिनी नदियों पर खतरे के बादल मंडराने लगे है।

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