रायगढ़/लैलूंगा विशेष रिपोर्ट।
अश्लील संदेश और शारीरिक संबंध के आरोपों से शुरू हुआ विवाद अब कथित फिरौती, धमकी और ब्लैकमेलिंग के दावों तक पहुंचा; मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज।
रायगढ़। लैलूंगा क्षेत्र के शासकीय महाविद्यालय कुंजारा से जुड़े चर्चित ‘थप्पड़कांड’ ने नया मोड़ ले लिया है। शुरुआत में यह मामला एक प्रोफेसर पर युवती द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से कथित अश्लील संदेश भेजने और शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाने के आरोपों के कारण सुर्खियों में आया था। बाद में प्रोफेसर के साथ हुई मारपीट का वीडियो भी सामने आया, जिसने पूरे मामले को चर्चा का विषय बना दिया।

घटना के बाद सामने आए कुछ कथित ऑडियो और वीडियो क्लिप्स ने इस प्रकरण में नया एंगल जोड़ दिया है। इन कथित साक्ष्यों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि प्रोफेसर से बड़ी रकम की मांग की गई और उन्हें कथित रूप से ब्लैकमेल करने का प्रयास किया गया। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
मारपीट का वीडियो हुआ वायरल
वायरल वीडियो में एक युवती अपने साथी के साथ प्रोफेसर के घर पहुंचकर उनके साथ मारपीट करती दिखाई दे रही है। वीडियो में युवती प्रोफेसर पर गंभीर आरोप लगाते हुए तीखी बहस करती है, जबकि प्रोफेसर की पत्नी बीच-बचाव करती नजर आती हैं।
कथित ऑडियो-वीडियो से उठे नए सवाल
घटना के बाद वायरल हुए कथित ऑडियो और वीडियो में प्रोफेसर से लगभग ढाई लाख रुपये की मांग किए जाने का दावा किया जा रहा है। साथ ही कथित तौर पर पैसे नहीं देने पर वीडियो वायरल करने और परिवार को नुकसान पहुंचाने जैसी धमकियों का भी उल्लेख सामने आया है। इन रिकॉर्डिंग्स की प्रामाणिकता की पुष्टि फिलहाल जांच का विषय है।
कई दावों पर बनी हुई है जांच की स्थिति
मामले में यह भी दावा किया जा रहा है कि युवती महाविद्यालय की छात्रा नहीं, बल्कि प्रोफेसर की पड़ोसन है। वहीं प्रोफेसर के परिवार का कहना है कि दोनों परिवारों के बीच पहले से पारिवारिक संबंध रहे हैं और जरूरत के समय आर्थिक सहायता भी दी गई थी। दूसरी ओर युवती ने प्रोफेसर पर लंबे समय से मानसिक प्रताड़ना और अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए हैं।
पुलिस जांच से ही सामने आएगा सच
पूरा मामला अब गंभीर कानूनी और सामाजिक बहस का विषय बन चुका है। एक ओर प्रोफेसर पर लगाए गए आरोप हैं, तो दूसरी ओर कथित ब्लैकमेलिंग और जबरन वसूली के दावे भी सामने आए हैं। ऐसे में इस प्रकरण का वास्तविक सच केवल पुलिस जांच, डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
फिलहाल दोनों पक्षों के आरोप और दावे जांच के दायरे में हैं। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच एजेंसियों की आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार किया जाना आवश्यक है।








