नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने संयुक्त हस्ताक्षर कर सौंपी 16 बिंदुओं की विस्तृत शिकायत
ग्रामीणों की आवाज बुलंद, भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट संघर्ष
कोरबा/कटघोरा: ग्राम पंचायत चाकाबुड़ा में बीते 5 वर्षों में भारी भ्रष्ट्राचार की परतें अब खुलने लगी हैं। पंचायत सचिव रजनी प्रधान, रोजगार सहायक अंजू सिदार, पूर्व सरपंच और उपसरपंच पर मिलीभगत कर लाखों रुपए के घोटाले करने का आरोप लगा है।
नवनिर्वाचित सरपंच उमाबाई, उपसरपंच कृष्णकला समेत पंचायत के पंच और लगभग 4 दर्जन ग्रामीणों ने कलेक्टर को 16 बिंदुओं पर आधारित लिखित शिकायत सौंपी है। शिकायत के आधार पर एक जांच टीम गांव पहुंची है।
मनरेगा में फर्जीवाड़ा, निजी लोगों को लाभ पहुंचाने के आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा योजना के तहत चलाई गई योजनाओं में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया है। वास्तविक पात्रों को दरकिनार कर अपात्रों को भूमि पट्टा और योजनाओं का लाभ पहुंचाया गया।
प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों से की गई अवैध वसूली
शिकायत में उल्लेख है कि पीएम आवास योजना के लाभार्थियों से हजारों की वसूली की गई। वहीं, स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वीकृत शौचालयों का निर्माण बिना कार्य किए ही कागजों में दिखा कर राशि का गबन किया गया।
गुणवत्ता विहीन निर्माण कार्य, आधे-अधूरे भवन, निजी संपत्ति में तब्दील सरकारी संसाधन
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मेन रोड से कदम चौक तक बनाए गए सीसी रोड की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि एक महीने में ही टूट गया। वहीं शोभित पटेल के घर से स्कूल पुलिया तक नाली निर्माण का 2.50 लाख का बजट पास कर लिया गया, लेकिन कार्य नहीं हुआ।
सबमर्सिबल पंप और सिंटेक्स टंकियों को निजी संपत्ति बताकर हटाया गया
ग्रामसभा में जवाब मांगने पर सचिव ने दिखाई अभद्रता
जब ग्रामीणों ने आय-व्यय का ब्यौरा मांगा, तो सचिव ने ‘पूछने का अधिकार नहीं’ कहकर अभद्र व्यवहार किया।
पद पर नियुक्ति में भी फर्जीवाड़ा, सचिव पर आय से अधिक संपत्ति का आरोप
शिकायत में खुलासा किया गया कि वर्तमान सचिव पूर्व में शिक्षाकर्मी पद पर चयनित हुआ था, लेकिन फर्जी दस्तावेज सामने आने पर बर्खास्त किया गया। इसके बावजूद उसे पंचायत सचिव का पद मिल गया। ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव ने भ्रष्टाचार कर आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है।
क्या होगी निष्पक्ष जांच या फिर कागजी खानापूर्ति?
ग्रामीणों का सवाल है कि क्या इस बार सही जांच होगी या पहले की तरह औपचारिकता निभाकर मामला दबा दिया जाएगा? उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्च स्तर पर शिकायत करेंगे।
पेयजल, नाली, सीसी रोड और सरकारी मद की राशि में भारी गड़बड़ी
ग्रामीणों ने बताया कि 14वें और 15वें वित्त आयोग, मूलभूत सुविधा योजनाओं के तहत करोड़ों की राशि आई, लेकिन धरातल पर कार्य नाम मात्र के हुए। यदि सभी कार्यों की भौतिक जांच कराई जाए, तो सच्चाई सामने आ सकती है।









