रायगढ़। एनटीपीसी लारा परियोजना से जुड़े बहुचर्चित भूअर्जन घोटाले में पूर्व एसडीएम तीर्थराज अग्रवाल को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को खारिज करते हुए अग्रवाल को सभी आपराधिक आरोपों से मुक्त कर दिया है।
यह मामला वर्ष 2013-14 का है, जब तीर्थराज अग्रवाल रायगढ़ में एसडीएम के पद पर पदस्थ थे। उनके कार्यकाल में ग्राम झिलगीतर में 160 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण कर मुआवजा वितरण किया गया था। इस प्रक्रिया में फर्जी खातों और दस्तावेजों के जरिये करोड़ों रुपये की अनियमितता के आरोप लगे थे। शिकायतों के आधार पर पुलिस ने अग्रवाल समेत अन्य पर IPC की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की एकलपीठ ने माना कि याचिकाकर्ता द्वारा पारित आदेश एक न्यायिक कार्यवाही थी, जो राजस्व अधिकारी के दायित्वों के अंतर्गत आता है। ऐसे मामलों में जजेज प्रोटेक्शन एक्ट, 1985 की धारा 3 के तहत उन्हें पूर्ण कानूनी संरक्षण प्राप्त है।
कोर्ट ने यह भी पाया कि एफआईआर में अग्रवाल का नाम प्रारंभ में नहीं था और उन्हें बाद में बिना ठोस साक्ष्य के जोड़ा गया। जांच और गवाहों के बयानों में भी उनके खिलाफ कोई सीधा प्रमाण नहीं मिला।
अदालत ने रायगढ़ न्यायालय द्वारा 13 जनवरी 2016 को आरोप तय करने के आदेश और 2 दिसंबर 2024 को दाखिल चार्जशीट को भी अमान्य घोषित कर दिया। साथ ही यह उल्लेख भी किया गया कि राज्य शासन पहले ही विभागीय जांच को बंद कर चुका है और विभाग ने अग्रवाल को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया था।
हाईकोर्ट का यह फैसला न्यायिक पदों पर बैठे अधिकारियों की भूमिका और उनकी विधिक सुरक्षा को मजबूती से रेखांकित करता है।








