स्वराज जयसवाल की विशेष रिपोर्ट
छत्तीसगढ़/बिलासपुर
छत्तीसगढ़/बिलासपुर जिले के कोटा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बेलगहना वन परिक्षेत्र के कुदूर इलाके में स्थित एक निजी एथनिक रिसॉर्ट में यह चौंकाने वाला मामला सामने आया। यह इलाका वन्यजीवों की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है।
गुप्त सूचना से खुला राज
वन विभाग को विश्वसनीय सूत्रों से सूचना मिली कि रिसॉर्ट में अवैध रूप से वन्यजीव का शिकार किया गया है और उसका मांस पकाया जा रहा है। सूचना मिलते ही विभाग सतर्क हो गया।
अधिकारियों की त्वरित कार्रवाई
डीएफओ के निर्देश पर कोटा एसडीओ के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने बिना देर किए रिसॉर्ट पर छापा मारा।
किचन में पकड़ा गया ‘सबूत’
छापेमारी के दौरान टीम ने रिसॉर्ट के किचन में बर्तन में मांस पकता हुआ पाया। यह दृश्य देखते ही मौके पर हड़कंप मच गया और कर्मचारियों में अफरा-तफरी फैल गई।
हिरण के मांस की पुष्टि (प्रारंभिक जांच)
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि पकाया जा रहा मांस हिरण का हो सकता है, जो कि वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत गंभीर अपराध है।

कर्मचारियों की संलिप्तता
मौके पर 8 से 10 कर्मचारी मौजूद पाए गए। जानकारी के अनुसार यह मांस रिसॉर्ट के मैनेजर और कर्मचारियों के उपयोग के लिए तैयार किया जा रहा था।

हिरासत और जांच जारी
वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी संदिग्धों को हिरासत में लिया है। मामले की गहन जांच जारी है और आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
वन्यजीव संरक्षण पर बड़ा सवाल
इस घटना ने पूरे क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सवाल उठ रहा है कि आखिर इतने संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की अवैध गतिविधियां कैसे संचालित हो रही थीं।
सख्त निगरानी की जरूरत
यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि अवैध शिकार पर रोक लगाने के लिए सख्त निगरानी, नियमित जांच और कठोर कार्रवाई बेहद जरूरी है।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर संवेदनशील वन क्षेत्र में अवैध शिकार का यह खेल कब तक चलता रहेगा?










