बिलासपुर। बिलासपुर रेल मंडल में दो दिन पहले हुए भीषण ट्रेन हादसे की पीड़ा अभी कम भी नहीं हुई थी कि आज फिर यात्रियों की जान खतरे में पड़ते-पड़ते बच गई। कोटमीसोनार और जयरामनगर स्टेशन के बीच एक ही ट्रैक पर दो मालगाड़ियों और एक पैसेंजर ट्रेन आ जाने से अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार, मध्य में पैसेंजर ट्रेन फंस गई, जबकि दोनों ओर से मालगाड़ियां उसी ट्रैक पर खड़ी थीं। यह दृश्य देखते ही यात्रियों में दहशत फैल गई और कई लोग डर के कारण ट्रेन से उतरकर भागने लगे।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह गड़बड़ी ‘ऑटो सिग्नलिंग सिस्टम’ की तकनीकी त्रुटि के कारण हुई, हालाँकि समय रहते स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया, जिससे बड़ी दुर्घटना टल गई।
4 नवंबर की दुर्घटना की याद ताज़ा
गौरतलब है कि 4 नवंबर को बिलासपुर में मेमू ट्रेन मालगाड़ी से टकरा गई थी, जिसमें 11 लोगों की मौत और 20 से अधिक घायल हुए थे। शुरुआती जांच में गलत सिग्नल पर ट्रेन चलाने की बात सामने आई थी। मृत चालक पर मामला दर्ज किया गया है, जबकि सहायक चालक की स्थिति गंभीर है।
आज की घटना ने एक बार फिर रेल सिग्नलिंग सिस्टम की खामी और सुरक्षा इंतज़ामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घायलों की सूची (पिछले हादसे से संबंधित)
घायलों में मुख्य रूप से —
मथुरा भास्कर (55), चौरा भास्कर (50), शत्रुघ्न (50), गीता देवनाथ (30), मेहनिश खान (19), कविता यादव (30), अंजला साहू (49), श्याम देवी गौतम (64), प्रीतम कुमार (18), शैलेष चंद्रा (35), सहित अन्य लोग शामिल हैं।
कई घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई थी, जबकि कुछ अब भी उपचाराधीन हैं।
लोगों की नाराज़गी
घटना के बाद यात्रियों और स्थानीय लोगों ने कहा कि दो दिन में दो बार जान पर खतरा आ जाना रेलवे की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
वरना आज एक और बड़ा हादसा सामने हो सकता था।








