नई दिल्ली। भारत ने 5G तकनीक को सफलतापूर्वक लागू करने के बाद अब 6G (छठी पीढ़ी की वायरलेस टेक्नोलॉजी) पर काम शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को डिजिटल क्रांति की दिशा में और आगे बढ़ाने का विजन पेश किया है। उनका कहना है कि साल 2030 तक भारत टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दुनिया का लीडर बन सकता है और 2040 तक अंतरिक्ष की दुनिया में भारत अग्रणी शक्ति के रूप में स्थापित हो जाएगा।
2025 में लॉन्च होगी सेमीकंडक्टर चिप
प्रधानमंत्री मोदी ने जानकारी दी कि अगस्त 2024 में ‘मेड इन इंडिया’ 6G टेक्नोलॉजी डेवलप करने की घोषणा की गई थी। इस पर तेजी से काम जारी है और साल 2025 के आखिर तक पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप लॉन्च की जाएगी। भारत सरकार का लक्ष्य है कि 6G तकनीक के जरिए देश को न सिर्फ डिजिटलाइजेशन में नई ऊंचाई मिले, बल्कि वर्ल्ड टेलीकॉम सेक्टर में भी भारत अग्रणी भूमिका निभा सके।
मार्च 2023 में भारत सरकार ने ‘भारत 6G विजन’ प्रस्तावित किया था। इस विजन के तहत सस्ती, टिकाऊ और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है, ताकि आपसी संवाद और डिजिटल वर्किंग कैपेसिटी को बढ़ाया जा सके।
6G टेक्नोलॉजी की खासियतें
- 6G नेटवर्क से यूजर्स को 1TB प्रति सेकंड तक की इंटरनेट स्पीड मिलेगी।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नेटवर्क और सैटेलाइट बेस्ड कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी।
- हाई बैंडविड्थ और स्पीड के लिए टेराहर्ट्ज (THz) स्पेक्ट्रम का उपयोग किया जाएगा।
- ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी पहुंचाने का लक्ष्य।
- साइबर सेफ्टी, रियल-टाइम एप्लिकेशंस, मेटावर्स, AR/VR और होलोग्राफिक कम्युनिकेशन की सुविधा संभव होगी।
कैसे हो रहा है विकास
भारत में 6G टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने के लिए 1 नवंबर 2021 को 6G इनोवेशन ग्रुप बनाया गया था। इसमें इंडस्ट्री, शैक्षणिक संस्थान, रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन और सरकार शामिल हैं। इस ग्रुप ने ही 6G टेक्नोलॉजी का रोडमैप और वर्क ड्राफ्ट तैयार किया है।
इसके अलावा भारत 6G अलायंस 3 जुलाई 2023 को गठित किया गया। यह मंच इंडस्ट्री और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने का काम कर रहा है। अलायंस का मकसद दुनियाभर में 6G पर काम कर रहीं कंपनियों के साथ MoU साइन करना और भारत को इस दिशा में योगदान देने लायक बनाना है।
अंतरराष्ट्रीय समझौते
- भारत ने अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) के IMT-2030 फ्रेमवर्क पर साइन किया है।
- 2023 के G20 समिट में भारत और अमेरिका के बीच 6G टेक्नोलॉजी को लेकर समझौता हुआ।
- भारत का वर्ल्ड 6G ऑर्गेनाइजेशन के साथ भी समझौता हो चुका है।
रिसर्च और टेस्टबेड
- देश की सभी 6 IITs के सहयोग से 6G टेस्टबेड बनाए गए हैं, जिसके लिए 2240 मिलियन रुपये का निवेश किया गया।
- टेलीकॉम टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TTDF) अक्टूबर 2022 में बनाया गया, जिसके तहत 275.88 करोड़ रुपये की लागत से 104 प्रोजेक्ट लॉन्च किए जाएंगे।
- 100 से अधिक 5G लैब स्थापित की गई हैं, जो 6G टेक्नोलॉजी के लिए रिसर्च और मैनपावर तैयार करने का कार्य करेंगी।










