आईएफएस कुमार निशांत पर चल रहे भ्रष्ट्राचार की जांच के बावजूद कटघोरा वनमंडल में चला रहे अपना भ्रष्ट्र राज…! 24 आईएफएस व 27 आईएएस अफसरों के खिलाफ राज्य शासन में दर्ज है शिकायत

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कोरबा/कटघोरा:- डीएफओ कुमार निशांत पर पद का दुरुपयोग कर भ्रष्ट्राचार और कमीशनखोरी कर राज्य शासन के तिजोरी को नुकसान पहुँचाने के मामले में जांच चल रही है। इसके बावजूद उनके कार्यप्रणाली पर सुधार नही आया है तथा कटघोरा वनमंडल में पदस्थ रहते हुए मनमाने भ्रष्ट्राचार को अंजाम दे रहे है। विधानसभा में भाजपा विधायक राजेश मूणत द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 24 भ्रष्ट्र आईएफएस व 27 आईएएस अफसरों के विरुद्ध हो रहे जांच के अतारांकित जवाब लिखित में दिए है। जिनमे से एक आईएफएस कुमार निशांत का नाम भी शामिल है।

प्रदेश में 24 आईएफएस व 27 आईएएस अफसरों के खिलाफ भ्रष्ट्राचार का केश दर्ज है। जिनके खिलाफ ईओडब्ल्यू व विभागीय जांच चल रही है। इनमें से कुछ को आरोपी बनाकर सलाखों के पीछे भी पहुँचा दिया गया है तो कुछ जमानत पर बाहर है, वहीं कुछ अफसरों पर विभागीय जांच चल रही है। लेकिन ये अभी कई मलाईदार पदों पर आसीन है। उनमें से एक आईएफएस है कुमार निशांत…! जानकारी के अनुसार जो 2016 बैच के अधिकारी है एवं 27 फरवरी 2023 को जिन्होंने कटघोरा वनमंडल का चार्ज लिया है। आईएफएस कुमार निशांत के विरुद्ध राज्य शासन द्वारा कराए जा रहे भ्रष्ट्राचार की जांच के बावजूद वे कटघोरा वनमंडल की कुर्सी पर भ्रष्ट्राचार की मलाई छानने में पीछे नही है तथा इनकी मौजूदगी में ऐसे- ऐसे कारनामे होते आ रहे है, जो न केवल अचंभित करने वाले है बल्कि भ्रष्ट्राचार की कहानी को खुला बयां कर रहे है। जिसकी जितनी तारीफ की जाए कम है। कटघोरा वनमंडल में इनके पूर्व पदस्थ रही डीएफओ शमा फारुखी व प्रेमलता यादव के कार्यकाल में तो भ्रष्ट्राचार की इंतहा ही हो गई थी। वही कुमार निशांत के पदस्थापना से उम्मीदें जगी थी कि विभागीय कार्यों में कसावट के साथ- साथ गड़बड़ घोटालों पर अंकुश लगेगा। लेकिन ये अधिकारी तो भ्रष्ट्राचार मामले में शमा व प्रेमलता से भी एक कदम आगे निकले। पसान रेंज में कैम्पा मद से कराए गए करोड़ो की लागत से सिंचित रोपणी पौधारोपण में घोटाले की जांच का जिम्मा पाली उप वनमंडल के एसडीओ चंद्रकांत टिकरिया को सौंपा गया था। भ्रष्ट्राचार के जिस मामले में 265 हेक्टेयर में पौधारोपण व उन पौधों को सींचने के लिए 21 बोर का खनन करा उन्हें जनरेटर के माध्यम से चलाया गया। जिसकी जांच रिपोर्ट आज तलक सार्वजनिक नही हुई और न ही किसी प्रकार के कार्रवाई का पता चला। अन्य रेंजों में लेन्टाना उन्मूलन खरपतवार के नाम पर भी भारी- भरकम राशि खर्च बताया गया है, तो तालाब- डबरी निर्माण के नाम पर भी करोड़ो का वारा- न्यारा किया गया। कैम्पा सहित विभागीय मद से होने वाले कार्यों की आड़ में जमकर झोली भरी गई है। जिनकी भी जांच राज्य शासन द्वारा निष्पक्ष तरीके से कराई जाए तो चौकाने वाले तथ्य उजागर होंगे और कुमार निशांत के विरुद्ध भ्रष्ट्राचार की कड़ी में एक कड़ी और जुड़ सकती है।

आईएएस व आईएफएस अफसर, जिनके भ्रष्ट्राचार की हो रही जांच
विधायक मूणत ने विधानसभा में सवाल पूछा था कि वर्ष 2019 से 16 दिसंबर 2024 तक कुल 24 आईएफएस अधिकारियों तथा 27 आईएएस अफसरों के खिलाफ विभिन्न विषयों में कुल 31 शिकायतें पंजीबद्ध कर जांच की जा रही है। इन शिकायतों की जांच किस स्तर के अधिकारी कर रहे है, शिकायतों की जांच शीघ्र पूरा हो इसके लिए क्या निर्देश जारी किए गए है। मुख्यमंत्री ने जवाब में कहा कि शिकायतों की जांच शीघ्र पूरा हो इसके लिए ईओडब्ल्यू, एसीबी द्वारा जांचकर्ता अधिकारियों को समय- समय पर निर्देशित किये जा रहे है। प्रकरणों के अनुपात में साधनों की गंभीर कमी होने के बावजूद जांच त्वरित गति से की जा रही है। जिन आईएफएस अधिकारियों पर भ्रष्ट्राचार के जांच चल रही है उनमें कुमार निशांत, शमा फारुखी, एस वेंकटाचलम, के के खेलवार, गोवर्धन, आर के जांगड़े, आलोक तिवारी, उत्तम कुमार गुप्ता, अरुण पाण्डेय, पंकज राजपूत, एस के पैकरा, रमेश चंद दुग्गा, गुरुनाथन एस, चूरामणि सिंह, लक्ष्मण सिंह, विवेकानंद झा, जनकराम नायक, राकेश चतुर्वेदी, दिलेश्वर साहू, शशि कुमार, आलोक कटियार तथा आईएएस अफसरों में राजेश कुमार टोप्पो, संजय अलंग, रानू साहू, समीर विश्वोई, डॉ. आलोक शुक्ला, अनिल टुटेजा, विवेक ढांड, निरंजन दास, कुलदीप शर्मा, सुरेंद्र कुमार जायसवाल, गौरव द्विवेदी, नरेंद्र कुमार दुग्गा, अशोक अग्रवाल, पुष्पा साहू, सुधाकर खलखो, राजेश सिंह राणा, डी डी सिंह, एस प्रकाश, अमृत कुमार खलखो, नूपुर राशि पन्ना, किरण कौशल, टी राधाकृष्णन, संजीव कुमार झा, इफ्फत आरा, भुवनेश यादव, जीवन किशोर ध्रुव व टामन सिंह सोनवानी शामिल है।

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