डोंगरगढ़ में साइबर क्राइम का बड़ा खुलासा: मोबाइल दुकानदार बना मास्टरमाइंड, हजारों फर्जी सिम से फैला ठगी का जाल

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भारत से लेकर यूएई, श्रीलंका, नेपाल और म्यांमार तक फैला था गिरोह, 98 गिरफ्तारियां, 7,063 फर्जी सिम कार्ड जारी

डोंगरगढ़: छत्तीसगढ़ पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़े एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। रेलवे चौक स्थित ‘अज्जू मोबाइल’ के संचालक अजय मोटघरे को इस रैकेट का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। जांच में सामने आया कि अजय ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए 7,063 सिम कार्ड जारी किए, जिनका उपयोग भारत, यूएई, श्रीलंका, नेपाल और म्यांमार जैसे देशों में ऑनलाइन ठगी के लिए किया जा रहा था।

इस गिरोह के तार बैंकिंग फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी, मनी लॉन्ड्रिंग और काले धन के लेनदेन से जुड़े पाए गए हैं। ‘ऑपरेशन साइबर शील्ड’ के तहत अब तक 98 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें बैंक अधिकारी, पीओएस एजेंट और म्यूल अकाउंट संचालक शामिल हैं।


कैसे काम करता था यह अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट?

पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ कि यह गिरोह बेहद संगठित और हाई-टेक तरीके से ठगी को अंजाम दे रहा था। फर्जी सिम कार्ड जारी करने से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग तक पूरा नेटवर्क अलग-अलग चरणों में काम करता था।

🔹 फर्जी सिम कार्ड जारी करने की रणनीति

  • अजय मोटघरे अपने ग्राहकों का डबल थंब स्कैन और आई-ब्लिंक डेटा इकट्ठा करता था।
  • इन पहचान पत्रों का दुरुपयोग कर हजारों सिम कार्ड सक्रिय कर दिए जाते थे
  • कई मामलों में केवल आधार कार्ड की फोटो कॉपी से भी सिम जारी कर दिए जाते थे
  • बाद में ये सिम कार्ड म्यूल अकाउंट संचालकों और साइबर ठगों को बेच दिए जाते थे

🔹 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर ठगी

  • फर्जी सिम कार्ड का उपयोग ओटीपी बायपास, ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड, फर्जी ई-वॉलेट ट्रांजेक्शन और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जाता था।
  • साइबर अपराधी इन सिम कार्डों का इस्तेमाल कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठगी को अंजाम देते थे
  • जांच में पाया गया कि ये सिम कार्ड यूएई, श्रीलंका, नेपाल और म्यांमार में सक्रिय साइबर ठगों को बेचे गए थे

🔹 मनी लॉन्ड्रिंग और फर्जी बैंक अकाउंट

  • गिरोह के सदस्य इन सिम कार्ड्स का इस्तेमाल कर फर्जी बैंक खाते खोलते थे
  • इन खातों में ठगी के जरिए मिली रकम को क्रिप्टोकरेंसी और अन्य माध्यमों से विदेश भेजा जाता था
  • सिम कार्ड और बैंक अकाउंट बेचने का रेट ₹5,000 से ₹50,000 तक होता था।

ऑपरेशन साइबर शील्ड: 98 गिरफ्तारियां, और बढ़ सकती है संख्या

आईजी अमरेश मिश्रा के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ पुलिस ने ऑपरेशन साइबर शील्ड शुरू किया था। अब तक 98 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें शामिल हैं:
बैंक अधिकारी – जो मनी लॉन्ड्रिंग में मदद कर रहे थे।
पीओएस एजेंट – जो फर्जी सिम कार्ड एक्टिवेट कर रहे थे।
म्यूल अकाउंट धारक – जो ठगी के पैसे को अपने खातों में रख रहे थे।

पुलिस को संदेह है कि गिरोह के कई और बड़े चेहरे सामने आ सकते हैं। जांच के आधार पर आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं


बड़े पैमाने पर हो रहा था फर्जीवाड़ा

  • 7,063 फर्जी सिम कार्ड जारी किए गए।
  • 590 मोबाइल फोन इस साइबर ठगी नेटवर्क में इस्तेमाल किए गए।
  • 12 पीओएस एजेंट (Airtel और Jio के) इस मामले में गिरफ्तार हुए हैं।
  • ठगी से जुड़े हजारों बैंक खाते और डिजिटल वॉलेट भी जांच के दायरे में हैं।

गिरफ्तार आरोपियों की सूची

डोंगरगढ़, राजनांदगांव, रायपुर, दुर्ग, भिलाई और मुंगेली से गिरफ्तार किए गए साइबर अपराधी:

1️⃣ कुलवंत सिंह छाबड़ा (राजनांदगांव)
2️⃣ खेमन साहू (राजनांदगांव)
3️⃣ अजय मोटघरे (डोंगरगढ़)
4️⃣ ओम आर्य (मुंगेली)
5️⃣ चंद्रशेखर साहू (रायपुर)
6️⃣ पुरुषोत्तम देवांगन (दुर्ग)
7️⃣ रवि कुमार साहू (भिलाई)
8️⃣ रोशन लाल देवांगन (दुर्ग)
9️⃣ के. शुभम सोनी (दुर्ग)
🔟 के. वंशी सोनी (दुर्ग)
1️⃣1️⃣ त्रिभुवन सिंह (भिलाई)
1️⃣2️⃣ अमर राज केशरी (भिलाई)
1️⃣3️⃣ विक्की देवांगन (दुर्ग)


पुलिस की अपील: सतर्क रहें, फर्जीवाड़े से बचें

इस हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी के खुलासे के बाद पुलिस ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है

✔️ अपने दस्तावेज किसी अजनबी को न दें।
✔️ अनजान नंबरों से आए कॉल और फर्जी ऑफर्स से बचें
✔️ यदि कोई सिम कार्ड बिना आपकी जानकारी के आपके नाम से जारी हुआ हो, तो तुरंत पुलिस या टेलीकॉम कंपनी से संपर्क करें
✔️ किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।


आगे क्या? और भी खुलासे संभव

साइबर पुलिस की टीम अजय मोटघरे और अन्य गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। पुलिस को शक है कि इस गिरोह से जुड़े कुछ और बड़े नाम जल्द ही सामने आ सकते हैं। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी से जुड़े और बड़े खुलासे होने की संभावना है

👉 छत्तीसगढ़ पुलिस साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की योजना बना रही है, ताकि इस तरह की ठगी पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

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