पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डेथ केस में बड़ा खुलासा: फर्जी डॉक्टर और अपोलो अस्पताल प्रबंधन पर FIR, लापरवाही से गई जान

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति को हिला देने वाले पूर्व विधानसभा अध्यक्ष पं. राजेन्द्र शुक्ल मौत मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। करीब 19 साल बाद यह केस फिर सुर्खियों में है। मामले में फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट और अपोलो अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है।

फर्जी डॉक्टर ने की थी सर्जरी, अपोलो पर भी गंभीर आरोप

पुलिस जांच में सामने आया कि खुद को डॉ. नरेंद्र विक्रमादित्य यादव उर्फ नरेंद्र जॉन कैम बताने वाले इस शख्स ने अपोलो अस्पताल में इलाज किया था। फर्जी डिग्री और पहचान के दम पर इस डॉक्टर ने सर्जरी की थी। पुलिस ने आरोपी पर IPC की धारा 420, 465, 466, 468, 471, 304 और 34 के तहत केस दर्ज किया है।

बेटे ने की शिकायत, दमोह से खुला मामला

यह मामला तब उजागर हुआ, जब स्व. पं. राजेन्द्र शुक्ल के पुत्र डॉ. प्रदीप शुक्ला ने सरकंडा थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी डॉक्टर की लापरवाही और अपोलो प्रबंधन की मिलीभगत से उनके पिता की मौत हुई। इसकी पड़ताल तब शुरू हुई, जब मध्य प्रदेश के दमोह जिले में इसी फर्जी डॉक्टर की वजह से कई लोगों की मौत हुई और बवाल मच गया।

जांच में मिली फर्जी पहचान

जांच में आरोपी डॉक्टर के नाम, जन्मतिथि और पिता का नाम अलग-अलग मिले। इससे उसकी पहचान फर्जी साबित हुई। पुलिस ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी पहले ही दमोह से की जा चुकी है।

अपोलो अस्पताल प्रबंधन पर भी FIR

शिकायत में यह भी कहा गया कि अपोलो अस्पताल प्रबंधन ने बिना डिग्री और दस्तावेजों की जांच किए इस फर्जी डॉक्टर को नौकरी दे दी। इसी लापरवाही की वजह से इलाज के दौरान मरीज की जान चली गई। पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन को भी FIR में आरोपी बनाया है और उनकी भूमिका की जांच शुरू कर दी है। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर अस्पताल प्रबंधन ने डॉक्टर की डिग्री और सर्टिफिकेट का सत्यापन क्यों नहीं किया?

 

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