कोरबा कटघोरा : जनपद पंचायत कटघोरा अंतर्गत ग्राम पंचायत चाकाबुड़ा में विकास कार्यों की रफ्तार इन दिनों थमी हुई है। पंचायत सचिव रजनी सूर्यवंशी पर लगे गंभीर आरोपों के बावजूद प्रशासन की चुप्पी और निष्क्रियता ग्रामीणों की नाराजगी का कारण बन रही है।
आरोप है कि सचिव रजनी सूर्यवंशी पूर्व सरपंच पवन सिंह और अन्य पंचायत पदाधिकारियों की मिलीभगत से वर्षों से पंचायत में पदस्थ रहते हुए करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों और शासकीय भूमि के प्रबंधन में व्यापक अनियमितताओं की दोषी रही हैं। नवनिर्वाचित सरपंच उमाबाई और उपसरपंच सहित पंचों ने सचिव को पंचायत से हटाने के लिए जनपद कार्यालय में शिकायत दी थी, लेकिन महीनों बीतने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव पंचायत भवन में उपस्थिति नहीं देतीं, पंचायत से जुड़ी चाबियाँ भी खुद के पास रखे हुए हैं और नए सरपंच को न तो कोई दस्तावेज सौंपे हैं और न ही आय-व्यय की जानकारी दी है। परिणामस्वरूप, मनरेगा से लेकर प्रधानमंत्री आवास योजना तक तमाम विकास योजनाएं बाधित हो गई हैं।
16 बिंदुओं में दर्ज शिकायत:
23 अप्रैल 2025 को कलेक्टर को सौंपी गई शिकायत में ग्रामीणों ने निर्माण कार्यों में लाखों की हेराफेरी, सरकारी जमीन की अवैध बिक्री, अपात्र व्यक्तियों को भूमि पट्टा, शौचालय निर्माण में फर्जीवाड़ा, पीएम आवास के हितग्राहियों से अवैध वसूली और पंचायत संपत्तियों की निजी उपयोग की बात कही है।
वहीं, गांव में लगे हैंडपंपों से सबमर्सिबल पंप व टंकियां निकाल कर पूर्व सरपंच द्वारा अपने घर ले जाने की बात सामने आई है, जिससे ग्रामवासी पेयजल संकट से जूझ रहे हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल:
शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज किए जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव को जनपद स्तर के अधिकारियों और जिले के एक प्रभावशाली जनप्रतिनिधि का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते वे अब तक अपने पद पर बनी हुई हैं।
ग्रामवासी उठाएंगे बड़ा कदम:
गांव के नागरिकों ने ऐलान किया है कि यदि जल्द ही सचिव पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे जिला मुख्यालय से लेकर राजधानी तक आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ पंचायत की नहीं, बल्कि ग्रामहित और जवाबदेह प्रशासन की पुनर्स्थापना के लिए है।
यह मामला कोरबा जिले की प्रशासनिक साख पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। जब जनहित से जुड़े गंभीर मुद्दों पर भी कार्रवाई ठप हो, तो विश्वास की दीवारें धीरे-धीरे गिरने लगती हैं।







