कोरबा पाली। पाली जनपद पंचायत के भीतर एक बड़ा भ्रष्टाचार का मामला उजागर होता दिखाई दे रहा है, जहां पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय राशि में गड़बड़ी की सुगबुगाहट ने शासन-प्रशासन को भी सकते में डाल दिया है। जनपद पंचायत सीईओ भूपेंद्र सोनवानी पर आरोप है कि उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों – सरपंचों और पंचों – के अगस्त 2024 से फरवरी 2025 तक के मानदेय का भुगतान जानबूझकर लंबित रखा और उसे हजम करने की तैयारी में थे।
बताया जा रहा है कि सीईओ द्वारा विभिन्न बहानों के माध्यम से महीनों तक मानदेय जारी नहीं किया गया, जबकि जिले के अन्य जनपदों में यह राशि पहले ही वितरित कर दी गई थी। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, जब पंचायत प्रतिनिधियों ने सीईओ से जवाब मांगा तो उन्हें “बजट अलॉट नहीं हुआ” कहकर गुमराह किया जाता रहा। जबकि सरकार की ओर से पहले ही पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय में वृद्धि कर सरपंचों को ₹4000 और पंचों को ₹500 मासिक निर्धारित किया जा चुका है।
इस पूरे प्रकरण की शिकायत एक पूर्व सरपंच द्वारा “सुशासन तिहार” के दौरान की गई थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि जनपद सीईओ ने प्रतिनिधियों की मानदेय राशि रोक रखी है और वित्तीय अनियमितता बरती जा रही है। इस शिकायत के सार्वजनिक होते ही मामला तूल पकड़ गया और पंचायत प्रतिनिधियों में भारी असंतोष देखने को मिला।
घटना की गंभीरता तब और बढ़ गई जब सीईओ ने जल्दबाज़ी में 77 लाख रुपये का चेक जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, पाली शाखा को जारी कर दिया। लेकिन बैंक खाते में मात्र 3 लाख रुपये ही शेष होने के कारण चेक बाउंस हो गया। इस पर कुछ जागरूक सरपंचों ने जब जवाबतलबी की तो सीईओ ने आनन-फानन में पूरा 77 लाख रुपये बैंक में जमा कर दिया।
सरपंचों का कहना है कि यदि यह मामला उजागर न होता तो मानदेय की यह बड़ी राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ सकती थी। इससे ना सिर्फ जनप्रतिनिधियों का विश्वास टूटा है, बल्कि शासन की पारदर्शिता और जवाबदेही भी सवालों के घेरे में आ गई है।
अब जरूरत है कि इस गंभीर मामले की उच्चस्तरीय जांच हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी योजनाओं और जनधन का दुरुपयोग करने वाले अफसरों पर लगाम लग सके और आम जनता का लोकतंत्र में विश्वास बना रहे।







