बलरामपुर-रामानुजगंज। विशेष रिपोर्ट।
बलरामपुर-रामानुजगंज। जिले के शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्राम पंचायत रामनगर के सरपंच सुनील सिंह ने विभाग पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए सरगुजा संभाग के आयुक्त कार्यालय में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत आवेदन प्रस्तुत किया है। उनका आरोप है कि एक ही मामले में शिक्षक पर तत्काल निलंबन की कार्रवाई कर दी गई, जबकि संकुल समन्वयक के खिलाफ जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बावजूद आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

सरपंच के अनुसार, संकुल समन्वयक विनोद कुमार पटेल के विरुद्ध जिला शिक्षा अधिकारी, बलरामपुर द्वारा पत्र क्रमांक 4727 दिनांक 25 मार्च 2026 के माध्यम से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद ग्राम पंचायत रामनगर ने 1 जून 2026 को सुशासन तिहार पोर्टल पर आवेदन क्रमांक 26643212100044 दर्ज कर मामले में कार्रवाई की मांग की।

मामले की जांच के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने 5 जून 2026 को आयुक्त, सरगुजा संभाग को पत्र भेजकर स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि शिकायत प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होती है तथा आवश्यक कार्रवाई की जाए। इसके बावजूद लगभग दो माह बीत जाने के बाद भी संबंधित संकुल समन्वयक के विरुद्ध कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई।
शिक्षक निलंबित, लेकिन संकुल समन्वयक पर कार्रवाई नहीं
इसी प्रकरण में शिक्षक सुरेन्द्र सिंह परस्ते के विरुद्ध 2 जुलाई 2026 को निलंबन आदेश जारी कर दिया गया। यही तथ्य अब विवाद का कारण बन गया है। सरपंच का कहना है कि यदि दोनों मामलों का आधार और आरोप एक ही हैं, तो केवल शिक्षक पर कार्रवाई और संकुल समन्वयक को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है? उन्होंने इसे विभाग की पक्षपातपूर्ण कार्यशैली बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
RTI में मांगी गई महत्वपूर्ण जानकारी
सरपंच सुनील सिंह ने 21 जुलाई 2026 को दायर सूचना के अधिकार आवेदन में आयुक्त कार्यालय से तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी मांगी है—
1. 5 जून 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा भेजे गए पत्र के बाद आयुक्त कार्यालय में क्या कार्रवाई की गई? संबंधित नोटशीट, आदेश एवं पत्राचार की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं।
2. जब जिला शिक्षा अधिकारी स्वयं आरोपों को प्रथम दृष्टया सही मान चुके हैं, तो संकुल समन्वयक के विरुद्ध निलंबन अथवा अन्य विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
3. यदि इसी मामले में शिक्षक को निलंबित किया गया है, तो संकुल समन्वयक के विरुद्ध समान कार्रवाई न होने के लिए कौन अधिकारी जिम्मेदार है?
शिकायत के साथ संलग्न किए दस्तावेज
सरपंच ने अपने RTI आवेदन के साथ सुशासन तिहार पोर्टल पर दर्ज शिकायत की प्रति एवं पोर्टल का स्क्रीनशॉट भी संलग्न किया है। उनका दावा है कि उपलब्ध दस्तावेज यह दर्शाते हैं कि मामले में विभागीय स्तर पर शिकायत दर्ज हुई थी और प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए गए थे।
30 दिन में जवाब नहीं मिला तो होगी पहली अपील
सरपंच सुनील सिंह ने कहा कि यदि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत निर्धारित 30 दिनों के भीतर संतोषजनक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती, तो वे प्रथम अपील दायर करेंगे। साथ ही, जिन अधिकारियों ने मामले में लापरवाही बरती या कार्रवाई रोककर रखी, उनके विरुद्ध भी विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की जाएगी।
अब यह देखना होगा कि आयुक्त कार्यालय RTI के माध्यम से मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराता है या नहीं, और यदि आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो क्या संकुल समन्वयक के विरुद्ध भी शिक्षक की तरह विभागीय कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला शिक्षा विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।








