कुटेशर नगोई में मुरुमीकरण के नाम पर 2.20 लाख की फर्जी निकासी, नियमों को दरकिनार कर डकारे गए 15वें वित्त आयोग के फंड

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कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा : ग्राम पंचायत कुटेशर नगोई में 15वें वित्त आयोग की राशि के दुरुपयोग का मामला उजागर हुआ है, जहां मुरुमीकरण कार्य के नाम पर नियम विरुद्ध तरीके से 2.20 लाख रुपए का भुगतान कर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया। तत्कालीन सरपंच श्रीमती अनिता ओड़े और पंचायत सचिव जयरतन कंवर पर इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने का आरोप है। मामले में जनपद स्तर के अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है, जिन्होंने स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद भुगतान को स्वीकृति दी।

मुरुमीकरण कार्य का कोई प्रावधान नहीं
सरकार की गाइडलाइन के अनुसार, 15वें वित्त आयोग की राशि का उपयोग केवल ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) के अंतर्गत निर्धारित कार्यों जैसे स्वच्छता (30%), शिक्षा (30%) और अधोसंरचना (40%) में किया जाना है। लेकिन कुटेशर नगोई से अमलडीहा तक मुरुमीकरण के नाम पर 22 नवम्बर 2022 को 88,000 रुपए तथा 6 जनवरी 2023 को 1,31,978 रुपए की राशि आहरित कर ली गई। जबकि ग्रामीणों के अनुसार यह मार्ग लगभग 5 वर्ष पहले ही मनरेगा योजना से निर्मित हुआ था और उस पर पंचायत की ओर से कोई मरम्मत कार्य हाल के वर्षों में नहीं किया गया।

न तकनीकी स्वीकृति, न जियो टैग
गाइडलाइन के मुताबिक, 50 हजार रुपए से अधिक के किसी भी कार्य के लिए तकनीकी स्वीकृति और जियो टैग अनिवार्य है। लेकिन इस शर्त से बचने के लिए कई पंचायतें 49 हजार तक की रसीदें बनाकर चरणबद्ध भुगतान का रास्ता अपना रही हैं, ताकि न तो कोई तकनीकी जांच हो और न ही कोई बाधा खड़ी हो। कुटेशर नगोई में भी कुछ ऐसा ही किया गया प्रतीत होता है।

प्रशासनिक चुप्पी भी संदेह के घेरे में
सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब मुरुमीकरण कार्य का कोई प्रावधान ही नहीं है, तो संबंधित अधिकारियों ने ऐसे कार्य का भुगतान कैसे स्वीकृत किया? क्या यह लापरवाही है या मिलीभगत? ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है।

व्यापक जांच की मांग
यदि जिले की अन्य ग्राम पंचायतों में 15वें वित्त आयोग की राशि से किए गए कार्यों की व्यापक जांच की जाए तो करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार सामने आ सकता है। अब देखना यह है कि इस मामले में प्रशासन संज्ञान लेकर जांच के आदेश देता है या नहीं।

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