बिलासपुर में भक्तों के लिए वैष्णो देवी और द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन अब एक ही स्थान पर संभव

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स्वराज जायसवाल की कलम से…..✍🏻

बिलासपुर, 14 जुलाई 2025 — अब बिलासपुर और आसपास के श्रद्धालुओं को वैष्णो देवी की कठिन चढ़ाई नहीं चढ़नी पड़ेगी। शहर से महज 7 किलोमीटर दूर नागोई गांव में वैष्णो देवी मंदिर का एक ऐसा भव्य रूप तैयार किया गया है, जो हूबहू जम्मू स्थित मूल मंदिर जैसा है। यही नहीं, मंदिर परिसर में भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग और अन्य देवी-देवताओं की भी स्थापना की गई है, जिससे यह स्थान भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन गया है।

⚡ द्वादश ज्योतिर्लिंग एक स्थान पर

मंदिर के एक भाग में भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृति स्थापित की गई है। इनमें सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, वैद्यनाथ, भीमाशंकर, रामेश्वर, नागेश्वर, विश्वेश्वर, त्र्यंबकेश्वर, केदारनाथ और घृणेश्वर शामिल हैं। श्रद्धालु सावन माह के पावन अवसर पर यहां पहुंचकर एक ही स्थान पर बारहों ज्योतिर्लिंगों का दर्शन और पूजन कर पा रहे हैं। इसके साथ ही मंदिर में गणेश जी और भैरव बाबा की मूर्तियां भी स्थापित हैं।

🛕 श्रद्धा का अनूठा केंद्र बना नागोई गांव

बिलासपुर के प्रतिष्ठित शर्मा परिवार द्वारा बनवाए गए इस मंदिर का उद्देश्य उन श्रद्धालुओं को वैष्णो देवी के दर्शन का अनुभव कराना है, जो जम्मू की दुर्गम पहाड़ियों पर नहीं जा पाते। मंदिर को लगभग 2000 वर्गफुट में तैयार किया गया है। यहां गुफा के भीतर माता वैष्णो देवी की प्रतिमा स्थापित की गई है, जिस तरह मूल मंदिर में दर्शन होते हैं। साथ ही नवदुर्गा, श्री गणेश, कार्तिकेय, बजरंगबली और भैरव बाबा की मूर्तियां भी विराजमान हैं।

🙏 कटरा से लाई गईं पावन पिंडियां

विशेष बात यह है कि मंदिर में स्थापित तीन पिंडियां सीधे जम्मू के कटरा से लाई गई हैं। इन्हें क्रमशः देवी सरस्वती, देवी लक्ष्मी और मां काली के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। पिंडियों के ऊपर प्रतीकात्मक मुकुट और छत्र भी लगाए गए हैं, जो मंदिर की भव्यता को और बढ़ाते हैं। गुफा के भीतर की रचना, मंदिर की वास्तुशिल्प शैली और वातावरण, सब कुछ श्रद्धालुओं को असली वैष्णो देवी मंदिर की अनुभूति कराता है।

🌿 श्रद्धालुओं के लिए एक नई आस्था स्थली

सावन माह में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या यहां पहुंच रही है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के जिलों से भी भक्तगण यहां आकर पूजन कर रहे हैं। नागोई गांव का यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बनता जा रहा है, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।

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