बिलासपुर। स्वराज जयसवाल की विशेष रिपोर्ट।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर स्थित एक निजी अस्पताल पर मानवता को शर्मसार करने वाले गंभीर आरोप लगे हैं। कोरिया जिले की एक आदिवासी महिला की इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन ने बकाया बिल का हवाला देते हुए शव सौंपने में देरी की। घटना सामने आते ही परिजनों में आक्रोश फैल गया और जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद मामला तूल पकड़ गया।

जानकारी के अनुसार, कोरिया जिले की 47 वर्षीय आदिवासी महिला सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए बिलासपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
मृतका के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने उपचार का पूरा बिल जमा करने तक शव सौंपने से इनकार कर दिया। इस कथित घटना से दुखी परिवार को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। परिजनों का कहना है कि शोक की घड़ी में भी उन्हें अस्पताल की शर्तों का सामना करना पड़ा, जो बेहद पीड़ादायक था।
घटना की जानकारी मिलते ही जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग अस्पताल पहुंचे तथा अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई। उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
इस घटना के बाद निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली, मरीजों और उनके परिजनों के अधिकारों तथा स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनशीलता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि चिकित्सा सेवा का उद्देश्य मानवता की रक्षा करना है, ऐसे में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह बेहद चिंताजनक मामला है।
फिलहाल प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की जा रही है। वहीं, समाचार लिखे जाने तक अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था। जांच रिपोर्ट और अस्पताल का पक्ष आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।









