शेख हसीना : ‘आयरन लेडी’ से दोषी करार होने तक—बांग्लादेश की सबसे मजबूत नेता का उत्थान और पतन

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बांग्लादेश की राजनीति में लगभग दो दशकों तक शेख हसीना का नाम सत्ता और स्थिरता का पर्याय रहा। एक ओर उनके समर्थक उन्हें आधुनिक, विकसित और स्थिर बांग्लादेश की निर्माता ‘आयरन लेडी’ कहते रहे, तो वहीं दूसरी ओर आलोचक उन्हें एक तानाशाह के रूप में देखते थे, जिन्होंने विपक्ष की आवाज़ को कुचल दिया और सत्ता बनाए रखने के लिए कठोर कदम उठाए। लेकिन शायद किसी ने कल्पना नहीं की होगी कि उसी न्यायाधिकरण, जिसे हसीना ने कट्टर युद्ध अपराधियों पर मुकदमा चलाने के लिए बनाया था, एक दिन उन्हें ही दोषी करार देगा।

आईसीटी का फैसला: मानवता के खिलाफ अपराध में मौत की सजा

सोमवार को बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई। यह सुनवाई पूरी तरह हसीना की अनुपस्थिति में हुई।
यह फैसला दुनिया की सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली महिला शासनाध्यक्षों में शामिल हसीना के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा और नाटकीय मोड़ माना जा रहा है।


हसीना के उत्थान से पतन तक की यात्रा

राजनीतिक विरासत में जन्म

शेख हसीना का जन्म 28 सितंबर 1947 को तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के तुंगीपाड़ा में हुआ। वह ऐसे राजनीतिक परिवार से थीं जिसने एक राष्ट्र के रूप में बांग्लादेश की स्थापना में निर्णायक भूमिका निभाई।

उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान, बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के नायक, ने 1971 में भारत की मदद से पूर्वी पाकिस्तान को पाकिस्तान के शासन से आज़ाद कराया और बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति बने।

शिक्षा और प्रारंभिक राजनीतिक कदम

हसीना ने ढाका विश्वविद्यालय से बांग्ला साहित्य में स्नातकोत्तर किया और कॉलेज के दिनों से ही छात्र राजनीति में सक्रिय रहीं।
साल 1968 में उन्होंने प्रमुख परमाणु वैज्ञानिक एमए वाजेद मिया से विवाह किया।
वाजेद मिया का शांत, शोधयुक्त जीवन बांग्लादेश की उथल-पुथल भरी राजनीति से बिल्कुल अलग था, फिर भी वे हसीना के सबसे महत्वपूर्ण सहारा बने रहे।
2009 में 67 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। दंपति के दो बच्चे हैं—सजीब वाजेद जॉय और साइमा वाजेद पुतुल।


1975 का तख्तापलट: जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी

अगस्त 1975 का सैन्य तख्तापलट हसीना के जीवन में विनाशकारी साबित हुआ।
इस दौरान उनके:

  • माता-पिता
  • तीन भाई
  • और परिवार के कई अन्य सदस्य

की निर्मम हत्या कर दी गई।
हसीना और उनकी छोटी बहन शेख रेहाना केवल इस कारण बच गईं क्योंकि उस समय वे विदेश में थीं।

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