बिलासपुर/तखतपुर। पार्थों चक्रवर्ती विशेष रिपोर्ट।
बिलासपुर/तखतपुर। विकासखंड तखतपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत सोनबंधा में पंचायत भवन और मुक्ति धाम जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बना हुआ है। ग्राम पंचायत के सरपंच पति विवेकानंद दिनकर, उपसरपंच एवं ग्रामवासियों ने VACHANNEWS टीम को अपनी समस्या से अवगत कराते हुए प्रशासन का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित किया है।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत में पंचायत भवन नहीं होने के कारण पंचायत से जुड़े कार्यों के संचालन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वहीं, गांव में मुक्ति धाम की व्यवस्था नहीं होने से सबसे अधिक परेशानी अंतिम संस्कार के समय सामने आती है।
बारिश के मौसम में बढ़ जाती है परेशानी
ग्रामीणों के मुताबिक बरसात के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। अंतिम संस्कार जैसे बेहद संवेदनशील और जरूरी कार्य के लिए उचित स्थान नहीं होने के कारण परिवारजनों एवं ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बारिश के बीच अंतिम संस्कार की व्यवस्था करना लोगों के लिए बेहद कठिन हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि मुक्ति धाम केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि गांव की गरिमा और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी आवश्यक सुविधा है। ऐसे में ग्राम पंचायत में इसका होना बेहद जरूरी है।
पंचायत भवन की भी लंबे समय से जरूरत
ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत भवन के अभाव में बैठकों, पंचायत संबंधी कार्यों और ग्रामीणों की समस्याओं पर चर्चा के लिए उचित स्थान उपलब्ध नहीं है। इससे पंचायत के नियमित कामकाज में भी परेशानी होती है।
सरपंच पति विवेकानंद दिनकर, उपसरपंच एवं ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ग्राम पंचायत सोनबंधा की जमीनी स्थिति को देखते हुए जल्द से जल्द पंचायत भवन और व्यवस्थित मुक्ति धाम का निर्माण कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को इन बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान न होना पड़े।
ग्रामीणों की उम्मीद प्रशासन पर टिकी
ग्रामवासियों ने उम्मीद जताई है कि उनकी इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग एवं प्रशासन आवश्यक पहल करेगा। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के विकास के लिए सड़क, नाली और अन्य कार्यों के साथ-साथ पंचायत भवन एवं मुक्ति धाम जैसी मूलभूत सुविधाएं भी प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
अब देखना होगा कि सोनबंधा के ग्रामीणों की यह मांग कब पूरी होती है और पंचायत को अपनी इन बुनियादी जरूरतों के लिए कब तक इंतजार करना पड़ता है।







